*दनियावां-हिलसा के गांवों में खिल उठे हरसिंगार-पारिजात, मां काली व दुर्गा की पूजा में बढ़ी रौनक* --- *राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी बेटी को खत में लिखा था--" हरसिंगार की डाली से फूले तेरे अरमान*! -- *हरसिंगार चुपके से खिलते झर जाते हैं* डॉ0 राजीव नयन, युथ एजेंडा रिपोर्टर। -----🌷🌷💞💞🌾🌾🌈🧚🏾♂️🪴🪴🌹🖋️🌸📚🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *दनियावां / हिलसा (पटना):* शरद ऋतु के आगमन के साथ ही दनियावां, हिलसा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हरसिंगार और पारिजात के पौधे फूलों से लद गए हैं। इन दिनों सुबह-सुबह गांव की गलियों, बगीचों और आंगन में इन फूलों की सफेद चादर बिछी नजर आती है और इनकी भीनी-भीनी खुशबू से पूरा वातावरण महक उठता है। स्थानीय लोगों के अनुसार हरसिंगार को माता का सबसे प्रिय फूल माना जाता है। इसे पारिजात, शेफालिका और रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यह स्वर्ग से आया हुआ फूल है और इसे मां दुर्गा, मां काली और भगवान शिव पर चढ़ाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन दिनों दनियावां के नवयुवक नाट्यकला परिषद परिसर सरथुआ में मां काली जी की कृपा से भव्य पूजन उत्सव चल रहा है।यहां कमलेश बउआ शिक्षक के भराव व डॉ0 राजीव नयन,श्री अखिलेश कुमार विमलेश की बाड़ी में ये खुशबू से तर-बत्तर फूल खूब खिल रहे हैं। तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जगह-जगह कलश स्थापना और मां की आराधना हो रही है। ऐसे में हरसिंगार के फूलों का विशेष महत्व बढ़ गया है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में महिलाएं और बच्चे टोकरियां लेकर इन फूलों को चुनते हैं और फिर इन्हें माता को अर्पित करते हैं। परिषद के एक सदस्य ने बताया कि नवरात्रि और काली पूजा में हरसिंगार के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। रात में खिलने और सुबह झड़ जाने वाला यह फूल त्याग और समर्पण का प्रतीक भी है। केवल धार्मिक ही नहीं, औषधीय और सांस्कृतिक रूप से भी यह फूल बेहद महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद में इसके पत्तों और फूलों का उपयोग बुखार, गठिया और सर्दी-खांसी में किया जाता है। इसके नारंगी डंठल से पहले के समय में लोग कपड़े रंगने का काम लेते थे। गांव की बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि पहले इस केसरिया रंग से पुलाव, खीर और अन्य पकवानों में प्राकृतिक रंग और सुगंध के लिए इस्तेमाल किया जाता था। भगवान शिव को भी यह फूल अत्यंत प्रिय है। इसकी तेज और मनमोहक खुशबू के कारण इसे रात में महकने वाला सबसे पवित्र फूल कहा जाता है। फिलहाल दनियावां के सरथुआ तोप, हिलसा, शाहजहाँपुर, कंचनपुर, बड़ी केवई,कुंडली,जीवनचक सहित पूरे ग्रामीण बेल्ट में हरसिंगार की बहार है। शाम होते ही कलियां खिलने लगती हैं और सुबह होते-होते आंगन सफेद फूलों से भर जाता है। बच्चों के लिए यह किसी मेले से कम नहीं, तो महिलाओं के लिए भक्ति और सुगंध का संगम। प्रकृति की यह सौगात न सिर्फ आस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि बदलते मौसम में गांव की सुबह-शाम को और भी खुशनुमा बना रही है।
**दनियावां-हिलसा के गांवों में खिल उठे हरसिंगार-पारिजात, मां काली व दुर्गा की पूजा में बढ़ी रौनक* --- *राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी बेटी को खत में लिखा था--" हरसिंगार की डाली से फूले तेरे अरमान*! -- *हरसिंगार चुपके से खिलते झर जाते हैं* डॉ0 राजीव नयन, युथ एजेंडा रिपोर्टर। -----🌷🌷💞💞🌾🌾🌈🧚🏾♂️🪴🪴🌹🖋️🌸📚🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *दनियावां / हिलसा (पटना):* शरद ऋतु के आगमन के साथ ही दनियावां, हिलसा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हरसिंगार और पारिजात के पौधे फूलों से लद गए हैं। इन दिनों सुबह-सुबह गांव की गलियों, बगीचों और आंगन में इन फूलों की सफेद चादर बिछी नजर आती है और इनकी भीनी-भीनी खुशबू से पूरा वातावरण महक उठता है। स्थानीय लोगों के अनुसार हरसिंगार को माता का सबसे प्रिय फूल माना जाता है। इसे पारिजात, शेफालिका और रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यह स्वर्ग से आया हुआ फूल है और इसे मां दुर्गा, मां काली और भगवान शिव पर चढ़ाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन दिनों दनियावां के नवयुवक नाट्यकला परिषद परिसर सरथुआ में मां काली जी की कृपा से भव्य पूजन उत्सव चल रहा है।यह...