कबीर मठ, फतुहा में दिव्यांगजन सशक्तिकरण की नई मिसाल*
युय एजेंडा की रिपोर्ट
*“संबल” योजना के तहत जागरूकता और अधिकारों का ऐतिहासिक संगम*
*फतुहा (पटना)।*
पटना जिला के फतुहा प्रखंड अंतर्गत ऐतिहासिक *कबीर मठ* परिसर में आज दिनांक *8 फ़रवरी 2026* को दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक *प्रेरणादायी, जनहितकारी और ऐतिहासिक कार्यक्रम* का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन *एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स विथ डिसैबलिटीज* के तत्वावधान में *मुख्यमंत्री दिव्यांगजन छत्र योजना “संबल”* के अंतर्गत संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट और प्रभावी था—
सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की *अधिकतम पूर्ति,*
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे दिव्यांग भाई-बहनों को *सरकारी योजनाओं से जोड़ना,*
तथा उन्हें *सम्मान, अधिकार और आत्मनिर्भरता* की मुख्यधारा से जोड़कर सशक्त बनाना।
*जागरूकता से आत्मविश्वास तक का सफ़र*
इस अवसर पर उपस्थित दिव्यांगजनों को “संबल” योजना सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न *जनकल्याणकारी योजनाओं की सरल, व्यावहारिक और विस्तारपूर्वक जानकारी* दी गई।
जानकारी पाकर दिव्यांगजनों के चेहरों पर *नई उम्मीद, विश्वास और आत्मनिर्भर भविष्य की चमक* स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
*गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव*
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में—
👉 *राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा “कवि जी”*
👉 *राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री हरदेव प्रसाद जी*
की सशक्त एवं मार्गदर्शक उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में—
*श्री संजीव कुमार* (जिला अध्यक्ष सह राज्य मीडिया प्रभारी, पटना)
"श्री धर्मवीर शर्मा* (रोहतास जिला अध्यक्ष सह राज्य चिकित्सक प्रभारी)
*श्री यशु पाल* (राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी)
*सुश्री अंजू कुमारी" (राज्य महिला प्रभारी)
"श्री शिशुपाल* (जिला सचिव सह राज्य समन्वयक)
*श्री इंदल कुमार" (फतुहा सिटी अनुमंडल अध्यक्ष)
की प्रेरणादायी उपस्थिति ने कार्यक्रम को *नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया*।
"संगठन की एकजुटता बनी कार्यक्रम की ताक़त*
इस सफल आयोजन में संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं—
*विनय पांडे, रवीश कुमार, मुन्ना कुमार, रंजीत कुमार, धीरज कुमार, अनिल कुमार, छोटू कुमार, मंडल कुमार, छोटन दास, विष्णु कुमार, रामजल राम, परमात्मा जी, पूनम देवी, लाली देवी, पिंटू कुमार, कपिल देव यादव, मंगरु कुमार, लक्ष्मण पासवान, दिलीप पासवान, बुधन कुमार, कानू, सुरेंद्र पासवान*
सहित सैकड़ों दिव्यांग भाई-बहनों की उत्साहपूर्ण और अनुशासित भागीदारी रही।
*सशक्त संदेश*
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश था कि—
*दिव्यांगजन अब दया के नहीं, अधिकार के पात्र हैं*।“संबल” जैसी योजनाएँ तब सार्थक होती हैं जब वे ज़मीन तक पहुँचती हैं, और फतुहा का यह आयोजन उसी का सशक्त उदाहरण बना।


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