22वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन राज्यपाल ने किया उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित
*22वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन*
यूथ एजेंडा से नीलम वर्मा की रिपोर्ट
*महामहिम कुलाधिपति महोदय द्वारा उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मान*
दिनांक 25.11.2025
मगध विश्विद्यालय, बोधगया
आज लगभग एक दशक के उपरांत मगध विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गए। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं राज्यपाल माननीय श्री आरिफ मोहम्मद खान द्वारा की गयी एवं समारोह के विशिष्ट अतिथि माननीय उपसभापति, राज्यसभा श्री हरिवंश रहे। इस अवसर पर माननीय कुलपति मगध विश्वविद्यालय प्रो शशि प्रताप शाही एवं कुलसचिव डॉ बिनोद कुमार मंगलम ने विश्वविद्यालय प्रांगण में माननीय कुलाधिपति एवं विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया। माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति के लिए गार्ड ऑफ हॉनर प्रस्तुत किया गया , तत्पश्चात उनके द्वारा सत्येंद्र नारायण सिंहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र का शिलान्यास किया गया। इसके उपरांत दीक्षांत कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति की सेरेमोनियल गाउनिंग एवं अकादमिक शोभा यात्रा द्वारा की गई। राष्ट्रगान के उपरांत कुलसचिव ने माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति से दीक्षांत समारोह की अनुमति प्राप्त की एवं गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरुआत की। विशिष्ट अतिथि माननीय उपसभापति राज्यसभा श्री हरिवंश जी ने अपने दीक्षांत भाषण में लगभग एक दशक के उपरांत दीक्षांत समारोह के आयोजन के लिए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर शाही की एवं विश्विद्यालय के अधिकारी गणों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डिग्री महज कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि छात्रों के त्याग, मेहनत एवं उनके परिवार के योगदान का प्रतिफल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्त्व को प्रकाशित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत चतुर्थ औद्योगिक क्रांति में प्रवेश कर चुका है इस स्थिति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक चुनौती नहीं बल्कि एक अवसर है। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता 1.7 ट्रिलियन का योगदान देगी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में 10 मिलियन रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मगध विश्वविद्यालय में जिस कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र का शिलान्यास किया गया है वह आने वाले समय में बिहार में नई रौशनी का केंद्र बनेगा। नवयुवकों को देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड बताते हुए उन्होंने उनसे अपील की कि वे जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बने।
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों एवं विषयों के 34 छात्र छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए एवं 248 विद्यार्थियों को पी एच डी की उपाधि से सम्मानित किया गया। साथ ही इस अवसर पर मगध विश्वविद्यालय द्वारा श्री अवधेश नारायण सिंह, सभापति, बिहार विधान सभा एवं श्री रॉबर्ट चोंग्थियू, सचिव , बिहार सरकार को डी.लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा डॉ आशिक चौधरी को डी लिट एवं प्रो अखिलेश कुमार को डी एस सी की डिग्री प्रदान की गई।
विद्यार्थियों को कुलपति मगध विश्वविद्यालय प्रोफेसर शाही द्वारा अपनी शिक्षा का उपयोग देश एवं समाज के कल्याण हेतु करने की शपथ दिलाईं गई।
माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान ने अपने अध्यक्षीय भाषण में विद्यार्थियों एवं उनके माता पिता एवं अभिभावकों को बधाई दी। गुरुजनों को भी उन्होंने साधुवाद दिया। उन्होंने छात्रों पर भारतीय संस्कृति को बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने को प्रेरित किया और उनसे यह उम्मीद की कि वे अपनी शिक्षा एवं पतिभा का प्रयोग व्यावहारिक जीवन में भी करेंगे और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के सपने को पूरा करने में अपना योगदान देंगे। एकात्मकता के भारतीय दर्शन की ओर उन्होंने विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया और उनसे मानवीय संवेदना को बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति दो बार जन्म लेता है, पहली बार मां के गर्भ से और दूसरी बार जब वह विश्वविद्यालय में प्रवेश करता है। ज्ञान व्यक्तित्व में परिवर्तन लाता है और यह ज्ञान ऐसा होना चाहिए जो ना केवल आपके स्वयं के जीवन को बल्कि दूसरों के जीवन को, समाज को एवं देश को आलोकित करे। विद्यार्थियों को उनके भावी जीवन की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने अपने भाषण को विराम दिया।
समारोह का समापन राष्ट्र गान के पश्चात अकादमिक शोभा यात्रा से हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा मगध विश्वविद्यालय के कुलगीत की मनोरम प्रस्तुति भी की गई।
*दीक्षांत समारोह के सुअवसर पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन*
मगध विश्वविद्यालय, बोधगया में आयोजित 22वें दीक्षांत समारोह के पूर्व संध्या पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिवार एवं आगंतुक अतिथियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
इस अवसर पर प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ के सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा विविध रंगारंग प्रस्तुतियाँ, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य तथा मनमोहक सूफ़ी गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने कलाकारों की कला, ताल-लय व सूफ़ियाना माहौल का भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक संध्या का उद्देश्य भारतीय कला-संस्कृति के विविध आयामों को प्रस्तुत करना एवं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करना था। आयोजन समिति द्वारा पूरे कार्यक्रम को सफल एवं सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया गया।
कुलपति महोदय ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करते हैं बल्कि छात्रों को भारतीय कला और संगीत की परंपरा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।

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