गया जिले में बहु–आपदा जोखिम विश्लेषण (HRVCA) परियोजना अपने अंतिम चरण में — सात महीनों के ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक अध्ययन के बाद जिला प्रशासन ने साझा की मुख्य प्रारंभिक निष्कर्ष*
*गया जिले में बहु–आपदा जोखिम विश्लेषण (HRVCA) परियोजना अपने अंतिम चरण में — सात महीनों के ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक अध्ययन के बाद जिला प्रशासन ने साझा की मुख्य प्रारंभिक निष्कर्ष*
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
गया, बिहार | 27 Nov 2025
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गया ( जिला प्रशासन), द्वारा संचालित Hazard, Risk & Vulnerability & Capacity Assessment (HRVCA) परियोजना ने सात महीनों की गहन, तकनीकी व साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया के बाद अपने प्रमुख विश्लेषणात्मक चरण पूरे कर लिए हैं।
यह अध्ययन जिले के इतिहास में पहली बार इतनी गहराई से किया गया वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित बहु–आपदा जोखिम विश्लेषण है। यह न केवल गया बल्कि बिहार के अन्य जिलों के लिए भी मॉडल का कार्य कर सकता है।
परियोजना दिसंबर 2025 तक जारी रहेगी, जिसमें डिजिटल जोखिम एटलस और प्राथमिकता-आधारित कार्ययोजना जारी की जाएगी।
दो दिवसीय जिला स्तरीय वर्कशॉप्स (26–27 नवंबर 2025)
26 व 27 नवंबर 2025 को दो महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनमें परियोजना की mid-term findings, जोखिम मानचित्र, ब्लॉक-स्तरीय संवेदनशीलता, तथा विभाग-विशिष्ट सुझाव साझा किए गए।
जिलाधिकारी सह अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गया श्री शशांक शुभंकर
अध्ययन के संबंध में कहा कि
“यह सात महीनों में किया गया ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और अत्यंत व्यवस्थित अध्ययन है। इसके निष्कर्षों का सही उपयोग आने वाले वर्षों की जिला-स्तरीय योजनाओं की दिशा तय करेगा। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज होगी।”
ADM (आपदा प्रबंधन) – श्री कुमार पंकज
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए ADM, आपदा प्रबन्धन, गया ने कहा—
“आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग का काम नहीं, यह पूरे जिले का साझा दायित्व है। सभी विभागों के बीच इंटीग्रेशन और कोऑर्डिनेशन ही जोखिम कम करने की कुंजी है।”
सुश्री सुरभि सिंह ,ADMO, गया ने कहा—
“लाइटनिंग, डूबने, हीटवेव और अग्नि की घटनाओं में सभी विभाग की बड़ी भूमिका है। यह अध्ययन हमारे लिए डाटा -आधारित रणनीति बनाने और तेज़ प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने का मौका है।”
*परियोजना की अब तक की यात्रा — अप्रैल से नवंबर 2025*
अप्रैल 2025 में प्रारंभ हुई इस परियोजना में अब तक:
डेटा संग्रह और विश्लेषण
• 20–25 विभागों से आधिकारिक सूचनाएँ
• सभी 24 प्रखंडों से सूचना
• 75 ग्रामों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण
• FGDs, KIIs, स्थल निरीक्षण
• GIS आधारित जोखिम विश्लेषण
क्षमता निर्माण (Capacity Building)
• 6 प्रखंडों में ब्लॉक स्तरीय DRR प्रशिक्षण (Belaganj, Tekari, Sherghati, Amas, Imamganj, Dumariya)
• PRI, विभागीय अधिकारियों व स्वयंसेवकों की भागीदारी
तकनीकी अध्ययन
• Lightning व drowning deaths का ट्रेंड विश्लेषण
• ऐतिहासिक हज़ार्ड प्रोफ़ाइल
• Exposure–Vulnerability–Capacity विश्लेषण
Department-wise consultations
• कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग, नगर निगम, जल संसाधन, पुलिस, शिक्षा, ICDS, BIPARD, CUSB, व अन्य संगठनों की सक्रिय भागीदारी
गया के लिए पहचाने गए सात प्रमुख खतरे
1. वज्रपात (Lightning)
2. डूबना (Drowning)
3. सूखा (Drought)
4. हीटवेव (Heatwave)
5. आग (Fire)
6. बाढ़ (Flood)
7. भूकंप (Earthquake)
GIS आधारित मॉडलिंग में इमामगंज, दुमरिया, बाराचट्टी, मोहानपुर, डोभी, शेरघाटी आदि प्रखंडों में High–Very High जोखिम पाया गया।
सोशल–इकोनॉमिक वल्नरेबिलिटी अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
(75 गाँवों पर आधारित)
• कमजोर आय वर्ग, बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चों में जोखिम अधिक
• जल–संकट, कृषि जोखिम, सूखे का प्रभाव स्पष्ट
• नदियों/तालाबों के पास रहने वाले परिवारों में डूबने का उच्च जोखिम
डिजिटल रिस्क एटलस — अंतिम चरण में विकसित
दिसंबर 2025 तक जारी होने वाला एटलस:
• ब्लॉकवार जोखिम स्कोर
• हज़ार्ड-विशिष्ट GIS मानचित्र
• सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल
• संस्थागत क्षमता मूल्यांकन
• प्राथमिकता-फ्रेमवर्क
• उपयोग हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म
परियोजना का नेतृत्व
• जिलाधिकारी – श्री शशांक शुभंकर
• ADM, आपदा प्रबंधन – श्री कुमार पंकज
• ADMO/ सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी – सुश्री सुरभि सिंह
• DRR कंसल्टेंट (UNDP) – श्री अल्तमश खान
तकनीकी क्रियान्वयन: KPMG
सहयोगी संस्थान: CUSB, DIC, ICDS, स्वास्थ्य, कृषि, नगर निगम, BIPARD, पुलिस, मीडिया व All District Line Departments
आगे की दिशा (Way Forward – December 2025)
• HRVCA अंतिम रिपोर्ट
• प्राथमिकता-आधारित कार्ययोजना
• विभागीय SOPs
• जिला व ब्लॉक स्तरीय DDMP रोडमैप
Risk Assessment तभी सफल होगा जब सभी विभाग इसे दैनिक प्रशासनिक प्रक्रिया में शामिल करें और सामूहिक रूप से ज़िम्मेदारी निभाएँ।”

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें