डिजिटल सुगमता से आसान हुई दिव्यांगता की चुनौतियाँ : प्रो. शांडिल्य

 

डिजिटल सुगमता से आसान हुई दिव्यांगता की चुनौतियाँ : प्रो. शांडिल्य


टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में “दिव्यांगता से आगे : सभी के लिए जीवन को सुगम बनाने” विषय पर व्याख्यान आयोजित

यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा “दिव्यांगता से आगे : सभी के लिए जीवन को सुगम बनाने” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन कौटिल्य सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजन-अनुकूल वातावरण, समावेशी शिक्षा तथा सभी के लिए सुगम एवं सहज जीवन व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम के संरक्षक-सह-अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल सुगमता ने दिव्यांगता की चुनौतियों को काफी हद तक आसान बनाया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और समावेशी सोच के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने महाविद्यालय परिसर को अधिक सुगम, संवेदनशील और समावेशी बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

आईक्यूएसी समन्वयक एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. (डॉ.) रूपम ने कहा कि सुगमता केवल दिव्यांगजनों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता अनुराग कुमार सांस्कृत्यायन ने अपने व्याख्यान में कहा कि आधुनिक समाज में तकनीक, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को इस प्रकार विकसित किया जाना चाहिए जिससे हर व्यक्ति बिना किसी बाधा के अपनी क्षमताओं का उपयोग कर सके। उन्होंने समावेशी शिक्षा, सार्वभौमिक संरचना तथा डिजिटल सुगमता के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रो. अंजलि प्रसाद ने कहा कि समावेशी समाज के निर्माण के लिए संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

डॉ. शशि भूषण चौधरी ने कहा कि दिव्यांगजन-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने कहा कि तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय से समाज को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।

प्रो. शाइस्ता नूरी ने कहा कि समावेशी शिक्षा समाज में समानता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सहानुभूति, सहयोग और स्वीकार्यता की भावना विकसित की जा सकती है।

कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन डॉ. नूपुर ने किया। उन्होंने अपने संचालन से कार्यक्रम को गरिमामय एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया।

इस अवसर पर प्रो. अंजलि प्रसाद, प्रो. नवेंदु शेखर, प्रो. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. शाइस्ता नूरी, डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. ज्योत्सना कुमारी, डॉ. उषा किरण, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. देवारती घोष, डॉ. नूतन, डॉ. ओंकार पासवान, डॉ. सानंदा सिन्हा, डॉ. दीपिका शर्मा, डॉ. सुशोभन पलाधि, डॉ. शशि शेखर, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. सोनू प्रताप चौधरी, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. तरन्नुम, डॉ. इफत नसरीन सहित अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. रामदास प्रसाद, प्रो. विनोद प्रसाद, प्रो. योगेश्वर प्रसाद सिंह एवं प्रो. नरेंद्र प्रसाद की विशेष उपस्थिति रही। छात्रप्रतिनिधि अंकित तिवारी एवं शिवम कुमार भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

डॉ. मुकुंद कुमार, मीडिया समन्वयक ने इसकी जानकारी दी।

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