सड़क निर्माण की मांग को लेकर ऑटो चालकों ने किया चक्का जाम, जनप्रतिनिधियों और विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश

 सड़क निर्माण की मांग को लेकर ऑटो चालकों ने किया चक्का जाम, जनप्रतिनिधियों और विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

खुसरूपुर।

पटना जिले के खुसरूपुर नगर क्षेत्र में सोमवार को सड़क निर्माण की मांग को लेकर ऑटो चालकों और स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। स्टेट हाईवे से रेलवे गुमटी तक जाने वाली जर्जर और क्षतिग्रस्त सड़क के विरोध में ऑटो चालकों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान घंटों तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


प्रदर्शन कर रहे ऑटो चालकों का कहना था कि यह सड़क पिछले करीब बारह वर्षों से बदहाल स्थिति में है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और हल्की बारिश में भी यहां जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि आए दिन ऑटो पलट जाती है और यात्री घायल हो जाते हैं। बावजूद इसके विभाग और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।


सुबह से ही बड़ी संख्या में ऑटो चालक स्टेट हाईवे के पास इकट्ठा हुए और सड़क जाम कर प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सड़क जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूली बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।


ऑटो चालक संघ से जुड़े लोगों ने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। रोजाना ऑटो के पुर्जे खराब हो रहे हैं, मरम्मत पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और कई बार दुर्घटनाओं के कारण वाहन कई दिनों तक बंद रहता है। चालक महेंद्र कुमार ने कहा कि “हम लोग रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर वाहन चलाते हैं। कई बार यात्री गिरकर घायल हो चुके हैं। लेकिन प्रशासन को इससे कोई मतलब नहीं है।”


स्थानीय दुकानदारों ने भी आंदोलन का समर्थन किया। दुकानदारों का कहना था कि सड़क खराब रहने के कारण बाजार पर भी असर पड़ रहा है। ग्राहक आने से कतराते हैं और बारिश के दिनों में सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। कीचड़ और गंदगी के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।


ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत आती है, लेकिन विभाग वर्षों से निर्माण को लेकर मौन बना हुआ है। कई बार आवेदन, ज्ञापन और शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होता।


प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद क्षेत्र की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते। स्थानीय सांसद रविशंकर प्रसाद, पूर्व विधायक अनिरुद्ध यादव, पूर्व विधायक रणविजय सिंह उर्फ लल्लू मुखिया तथा विधायक अरुण कुमार पर लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सभी नेताओं ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन सड़क निर्माण को लेकर किसी ने गंभीर पहल नहीं की।


स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा कि “नेता लोग चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और विकास की बड़ी बातें करते हैं। लेकिन सड़क जैसी बुनियादी समस्या का समाधान तक नहीं कर पाए। बारह साल से लोग परेशान हैं, लेकिन किसी को जनता की चिंता नहीं है।”


महिलाओं ने भी सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है। गर्भवती महिलाओं और बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी होती है। कई बार एंबुलेंस भी इस सड़क पर फंस जाती है।


प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। लोगों ने कहा कि वे अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि काम चाहते हैं।


सड़क जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और लोगों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त कराने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कुछ घंटों के बाद जाम समाप्त कराया गया।


हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ऑटो चालकों ने कहा कि सड़क की बदहाली अब उनकी रोजी-रोटी और लोगों की जिंदगी दोनों के लिए खतरा बन चुकी है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क खुसरूपुर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य क्षेत्रों में आते-जाते हैं। लेकिन वर्षों से सड़क जर्जर होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को सड़क की स्थिति दिखाई गई, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों ने कहा कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण कर दिया जाता तो आज आंदोलन की नौबत नहीं आती।


क्षेत्र के बुजुर्गों ने बताया कि कभी यह सड़क इलाके की प्रमुख सड़कों में गिनी जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह टूट चुकी है। जगह-जगह गड्ढे और जलजमाव के कारण दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं। खासकर रात के समय वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है।


आंदोलन कर रहे युवाओं ने कहा कि सरकार विकास की बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सड़क, पानी और जलनिकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। लोगों ने मांग की कि सड़क निर्माण के साथ-साथ जलनिकासी की भी समुचित व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में जलजमाव की समस्या उत्पन्न न हो।


प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। राहगीरों और यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि प्रशासन की पहल के बाद स्थिति सामान्य हुई, लेकिन लोगों में अब भी गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।


स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि अब भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।


खुसरूपुर में सड़क निर्माण की मांग को लेकर हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर यह साबित करता है कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी किस तरह आम लोगों के गुस्से को आंदोलन में बदल देती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि लोगों की इस मांग को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो पाता है।

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