टी.पी.एस. कॉलेज में भू-जल विकास एवं प्रबंधन पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

 टी.पी.एस. कॉलेज में भू-जल विकास एवं प्रबंधन पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

पटना, 24 जून 2026।


टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB), मध्य-पूर्वी क्षेत्र, पटना द्वारा “Ground Water Development and Management Practices – Local Ground Water Issues” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एम.एल.एस. कॉलेज, मधुबनी के प्राचार्य प्रो. अवधेश कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भू-जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है तथा इसके सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। मुख्य अतिथि प्रो. अवधेश कुशवाहा ने अपने संबोधन में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण एवं जल संरक्षण की तकनीकों को जन-आंदोलन के रूप में अपनाने पर बल दिया।


प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय भू-जल बोर्ड के विशेषज्ञों ने बिहार में भू-जल की स्थिति, भू-जल स्तर निगरानी एवं डेटा प्रसार, गतिशील भू-जल संसाधन आकलन, राष्ट्रीय एक्वीफर मानचित्रण एवं प्रबंधन, वर्षा जल संचयन एवं कृत्रिम पुनर्भरण, भू-जल गुणवत्ता, भू-भौतिकीय अन्वेषण तकनीकों तथा भू-जल विनियमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने भू-जल संसाधनों के संरक्षण एवं विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।


कार्यक्रम का आयोजन रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वयन में विभागाध्यक्ष डॉ. शशि प्रभा दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों एवं अतिथियों में प्रो. रूपम, डॉ. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. शशि भूषण चौधरी, प्रो. शाइस्ता नूरी, प्रो. नवेंदु शेखर, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. सुशोभन पलाधी, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. अंकित तिवारी तथा श्री शिवम पराशर सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए क्विज एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया। तत्पश्चात सफल प्रतिभागियों के बीच प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया तथा भू-जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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