*नई शिक्षा नीति के तहत एनएसएस द्वारा कॉलेज में अग्नि सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित*
*नई शिक्षा नीति के तहत एनएसएस द्वारा कॉलेज में अग्नि सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित*
*फायर अफसर बोले- 80% मौतें धुएं से, भगदड़ नहीं- सूझबूझ बचाएगी जान*
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*Youth Agenda,रिपोर्टर,डॉ0 राजीव नयन* दनियावां, प्रतिनिधि
*दनियावां(पटना)।* दनियावां-हिलसा मार्ग पर अवस्थित समीपवर्ती श्रीचंद उदासीन महाविद्यालय,हिलसा के सभागार में शुक्रवार को नई शिक्षा नीति-2020 के तहत AEC-4 के NSS छात्रों के लिए अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। बिहार अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने वॉलेंटियर्स को आग से बचाव की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. शिवचंद्र सिंह, अग्निशमन अनुमंडल पदाधिकारी शंभू कुमार प्रसाद, प्रधान अग्नि सहायक रजनीश कुमार, हिलसा फायर ब्रिगेड की पूनम कुमारी, NSS प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ. पिंकी कुमारी, डॉ. संदीपा इंद्रा, मीडिया कर्मी डॉ. राजीव नयन एवं डॉ. प्रभात कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य अग्निशमन पदाधिकारी शंभू कुमार प्रसाद ने कहा कि आग लगना दुर्घटना है और इसे बुझाना इमरजेंसी सेवा। "हमारा मकसद आपको आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। होटल, हॉस्पिटल या कॉलेज में आग लगे तो भागें नहीं, भगदड़ न मचाएं। सूझबूझ से ही जानें बचेंगी।"
प्रधान अग्नि सहायक रजनीश कुमार ने आग के तीन कारण बताए— मानव निर्मित, औद्योगिक और प्राकृतिक। जंगल में सूखे पत्तों की रगड़ से भी आग लग जाती है। उन्होंने चेताया कि किचन में हमेशा पानी से भरी बाल्टी रखें। गैस पाइप समय-समय पर अधिकृत एजेंसी से ही बदलवाएं। फायर ब्रिगेड का सायरन सुनते ही रास्ता खाली कर दें।
प्राचार्य प्रो. शिवचंद्र सिंह ने कहा, *"आग जरूरी है लेकिन इसका सावधानी से यूज ही सही कदम है।"* गैस की गंध आने पर बिजली का स्विच न छुएं। खाना बनाते समय सूती कपड़े पहनें और रसोई में हवा का आवागमन रखें। कुंभ मेले में हुई आगजनी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अफरातफरी और कुप्रबंधन से ही पैनिक फैलता है। अग्निशमन अधिकारियों ने कॉलेज प्रांगण में गैस सिलेंडर में आग प्रज्वलित कर उसे आसानी से बुझाने के तरीके बताए।उन्होंने आग के प्रकार समझाए— A श्रेणी: लकड़ी-कागज, B श्रेणी: पेट्रोल-डीजल, C श्रेणी: घरेलू गैस, D श्रेणी: मेटल व इलेक्ट्रिक फायर। हर आग बुझाने का तरीका अलग है।
NSS पदाधिकारी डॉ. पिंकी कुमारी ने बच्चों को पटाखों से दूर रखने की सलाह दी। मीडिया कर्मी डॉ. राजीव नयन सिंह ने कहा कि दीपावली-छठ पर पटाखे खुले स्थान पर अभिभावकों की देखरेख में ही चलाएं। शरीर में आग लगने पर भागें नहीं, बल्कि जमीन पर लेटकर लुढ़खें।
*जान बचाने वाले 4 नियम पर अग्निशमन अधिकारियों ने सबको जोर देकर बताया*
1. *धुआं ही असली दुश्मन*: 80% मौतें आग से नहीं, धुएं से दम घुटने से होती हैं। नीचे झुककर, गीले कपड़े से मुंह ढककर निकलें।
2. *गैस लीक पर*: खिड़की-दरवाजे खोलें, बिजली का स्विच न छुएं, माचिस न जलाएं।
3. *101 है जीवन रेखा*: आग लगते ही 101 या 112 डायल करें। पता साफ-साफ बताएं।
4. *किचन मंत्र*: रात को सोने से पहले गैस रेगुलेटर बंद करें। सिंथेटिक कपड़े पहनकर खाना न बनाएं।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. संदीपा इंद्रा और प्रो. प्रभात कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर प्रधान सहायिका सुभद्रा सिन्हा, लेखापाल रोनित राय, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. राजीव नयन,आलोक कुमार सिंह,कुमार पवन,जलेन्द्र,मुनिल पटेल, सचिव शैलेश कुमार, तकनीकी सहायक मधुसूदन कुमार, वीरेंद्र कुमार,नवीन कुमार,चिंटू,संगीता, नवीन मालाकार,शांति सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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