टी.पी.एस. कॉलेज में "जीवन विज्ञान के उभरते आयाम : अणुओं से पारितंत्र तक" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

 अनुसंधान संस्कृति से ही बनेगा विकसित भारत : प्रो. शांडिल्य


टी.पी.एस. कॉलेज में "जीवन विज्ञान के उभरते आयाम : अणुओं से पारितंत्र तक" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

पटना, 10 जुलाई। टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के वनस्पति विज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में "जीवन विज्ञान के उभरते आयाम : अणुओं से पारितंत्र तक" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मनोरमा कुमारी उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता के रूप में यूपीईएस, देहरादून के प्रो. ध्रुव कुमार तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में आईसीएमआर-राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (आरएमआरआईएमएस), पटना के वैज्ञानिक-डी डॉ. आशीष कुमार ने अपने विचार साझा किए।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि अनुसंधान संस्कृति ही विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, शोध एवं समाजोपयोगी ज्ञान के सृजन को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि टी.पी.एस. कॉलेज विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान संस्कृति एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा ऐसे राष्ट्रीय आयोजन युवा शोधार्थियों को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।


वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं आयोजन संयोजक डॉ. विनय भूषण कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि जीवन विज्ञान अब केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जीनोमिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-सूचना विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान के समन्वय से विज्ञान का नया युग प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतर्विषयी अनुसंधान ही भविष्य की वैज्ञानिक प्रगति का आधार है तथा ऐसे सेमिनार विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों एवं उभरते शोध क्षेत्रों से जोड़ने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं।


मुख्य वक्ता प्रो. ध्रुव कुमार ने अपने व्याख्यान में स्तन कैंसर के शीघ्र एवं सटीक निदान, नई औषधियों की खोज, परिशुद्ध चिकित्सा तथा प्रयोगशाला से उपचार तक के अनुसंधान के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बीआरसीए-1, बीआरसीए-2, एचईआर-2, टीपी-53 एवं पीआईके-3-सीए जैसे कैंसर से जुड़े प्रमुख जीनों तथा एस्ट्रोजन रिसेप्टर, एनएफ-केप्पा-बी, एपी-1, स्टैट-3 एवं एचआईएफ-1 अल्फा जैसे ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीनोमिक्स एवं आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के समन्वय से कैंसर के निदान और उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।


विशिष्ट वक्ता डॉ. आशीष कुमार ने कालाजार के हर्बल उपचार तथा उसमें पाए जाने वाले जैव-सक्रिय मेटाबोलाइट्स की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित औषधियों का विकास भविष्य की चिकित्सा का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। उन्होंने औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।


मुख्य अतिथि प्रो. मनोरमा कुमारी ने अपने संबोधन में आधुनिक शोध में जीनोमिक्स विश्लेषण की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जीनोमिक्स-आधारित अनुसंधान रोगों की सटीक पहचान, व्यक्तिगत चिकित्सा, जैव-विविधता संरक्षण तथा कृषि एवं स्वास्थ्य विज्ञान में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। उन्होंने युवा शोधार्थियों से अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर गुणवत्तापूर्ण एवं समाजोपयोगी अनुसंधान करने का आह्वान किया।


आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. (डॉ.) रूपम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार एवं बहुविषयक अध्ययन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, जीनोमिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उभरते शोध क्षेत्रों से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर की शोध संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


महाविद्यालय के शोध समन्वयक डॉ. रवि प्रभाकर ने कहा कि वर्तमान समय में जीवन विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान की दिशा तीव्र गति से बदल रही है। जीनोमिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी एवं प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित अनुसंधान भविष्य की वैज्ञानिक प्रगति के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ शोधार्थियों एवं युवा वैज्ञानिकों को नवीन शोध पद्धतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा अकादमिक सहयोग के लिए प्रेरित करती हैं तथा गुणवत्तापूर्ण शोध को नई दिशा प्रदान करती हैं।


संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने जीवन विज्ञान के समकालीन विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने प्रस्तुत शोध-पत्रों की समीक्षा करते हुए प्रतिभागियों को शोध की गुणवत्ता, कार्यप्रणाली तथा भविष्य की संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रतिभागियों ने भी विषय से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं पर विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।


महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. मुकुंद कुमार ने कहा कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी जीवन विज्ञान के नवीनतम अनुसंधानों, आधुनिक तकनीकों एवं अंतर्विषयक शोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल है। इससे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को देश के अग्रणी वैज्ञानिकों के अनुभवों से सीखने तथा भविष्य के अनुसंधान के नए आयामों को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुआ।


समापन सत्र में शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस क्रम में जंतु विज्ञान के शोध छात्र डॉ. अंकित तिवारी एवं शिवम पराशर एवं मुस्कान कुमारी  ने सर्वश्रेष्ठ शोध-प्रस्तुति का पुरस्कार प्राप्त किया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी से प्राप्त ज्ञान, विचार-विमर्श एवं शोध अनुभव प्रतिभागियों के भावी अनुसंधान कार्यों को नई दिशा प्रदान करेंगे।


इस अवसर पर टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के शिक्षक प्रो. नवेंदु शेखर, प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. देवारति घोष, डॉ. सुषोभन पलाधी, डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. सानंदा सिन्हा, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. ज्योत्स्ना कुमारी, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. सोनू प्रताप, डॉ. सुनीता कुमारी, प्रो. रामदास प्रसाद (सेवानिवृत्त), प्रो. नरेंद्र सिंह (सेवानिवृत्त), श्री मनोज कुमार सिंह, श्री कुमार अमिताभ, श्री दीपक कुमार सिंह, श्री वेंकटेश कुमार, श्री तुमुल आनंद, छात्र प्रतिनिधि डॉ. अंकित तिवारी एवं शिवम पराशर सहित महाविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

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