डिजिटल तकनीक और शोध नैतिकता से ही तैयार होंगे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक : प्रो. तपन कुमार शांडिल्य

 डिजिटल तकनीक और शोध नैतिकता से ही तैयार होंगे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक : प्रो. तपन कुमार शांडिल्य



यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

टी.पी.एस. कॉलेज में "डिजिटल केमिस्ट्री" पर छह दिवसीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का शुभारम्भ


पटना, 13 जुलाई। ठाकुर प्रसाद सिंह (टी.पी.एस.) कॉलेज, पटना के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को "डिजिटल केमिस्ट्री: पब्लिकेशन रेडीनेस इन केमिकल साइंसेज – फ्रॉम सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिसिस टू साइंटिफिक राइटिंग" विषयक छह दिवसीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का शुभारम्भ कौटिल्य सभागार में हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को शोध-प्रबंध, शोध-पत्र लेखन तथा आधुनिक डिजिटल शोध उपकरणों के प्रभावी उपयोग में दक्ष बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि आज उत्कृष्ट अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक, वैज्ञानिक डेटा विश्लेषण, प्रभावी वैज्ञानिक लेखन तथा शोध नैतिकता के समन्वय से ही विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता का शोध संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों से साहित्यिक चोरी, डेटा मिथ्याकरण एवं शोध परिणामों की भ्रामक प्रस्तुति जैसी अनैतिक प्रवृत्तियों से दूर रहने तथा मौलिकता, पारदर्शिता और अकादमिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।


पाठ्यक्रम समन्वयक एवं रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुषोवन पलाधी ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए आधुनिक रासायनिक सॉफ्टवेयर, वैज्ञानिक डेटा विश्लेषण, रेफरेंस मैनेजमेंट, शोध-साहित्य की खोज तथा वैज्ञानिक लेखन में दक्षता अनिवार्य हो गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से सभी सत्रों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।


आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. रूपम ने कहा कि यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक प्रकाशनों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करेगा। उन्होंने इसे विद्यार्थियों की शोध क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं प्रकाशन कौशल को नई दिशा देने वाली पहल बताया। वहीं डॉ. उमेश कुमार एवं डॉ. सोनू प्रताप चौधरी ने भी कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को प्रत्येक शैक्षणिक एवं व्यावहारिक सत्र का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के अंत में डॉ. शशि प्रभा दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। छह दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 18 जुलाई तक चलेगा, जिसमें रासायनिक संरचना निर्माण, रिएक्शन मैकेनिज्म, IUPAC नामकरण, NMR पूर्वानुमान, वैज्ञानिक साहित्य खोज, रेफरेंस मैनेजमेंट, प्रकाशन-स्तरीय ग्राफिक्स, शोध नैतिकता तथा वैज्ञानिक लेखन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।


इस अवसर पर डॉ. देबारती घोष, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. प्रशांत कुमार, मीडिया प्रभारी डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. शशि शेखर कुमार सिंह, डॉ. रवि प्रभाकर सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित थे।

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