संत बौद्धिक मंच ने किया सनातन सहभोज का आयोजन

 संत बौद्धिक मंच ने किया सनातन सहभोज का आयोजन 


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

गया जी। नर ही नारायण है। दरिद्र नारायण की सेवा से भीलौकिक और पारलौकिक दोनों लोको  में व्यक्ति को स्वर्गिक आनंद की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म उच्च नीच ,जात पात और अगड़े पिछड़े की परिभाषा से मुक्त है।सनातन धर्म में दरिद्र नारायण को भोजन करना सर्वोत्तम पुण्य  माना गया है। यह कहना है अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के राष्ट्रीय महासचिव  तथा श्री गौरी शंकर बैकुंठ धाम न्यास समिति के कोषाध्यक्ष पीठाधीश्वर डॉक्टर  स्वामी श्यामा नंद जी महाराज का।

    डॉ श्यामानंद जी महाराज गया में धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सनातन धर्म नारायण सहभोज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पीठाधीश्वर श्री श्यामा नंद ने कहा कि सनातन धर्म से ही संस्कार संस्कृति और सभ्यताओं की रचना हुई है। 

    अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के मुख्य संगठन महामंत्री डॉ अनमोल कुमार ने सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म और कर्म का संतुलित परिभाषा सनातन धर्म के वेद पुराणों में ही समाहित है। डॉ अनमोल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी स्वदेशानंद जी महाराज ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए लंबे समय तक मां नर्मदा की हजारों किलोमीटर परिक्रमा कर विश्व के सनातनियों को एकजुट करने हेतु शंखनाद किया। 

  अनमोल ने बताया कि स्वामी स्वदेश आनंद जी 2026 के अंत तक 25 लाख सनातनियों को संगठन से जुड़ने का संकल्प लिया है और इसके लिए वे  भारत यात्रा पर भी निकलने वाले हैं ।इस सहभोज में हजारों दरिद्र नारायण को संगत पंगत के माध्यम से भोजन कराया गया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

किसान सलाहकार निकला मास्टरमाइंड तीन कट्टा 114 कारतूस बरामद

साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का प्रेम यूथ फाउंडेशन में हुआ आयोजन,विशेषज्ञों ने ऑनलाइन ठगी से बचाव के टिप्स

पूर्व मुखिया के घर चोरी का प्रयास चोर चढ़ा ग्रामीणों के हत्थे