गांधी के सपनों के भारत पर युवाओं ने रखे विचार, स्वयंसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हुआ मंथन
गांधी के सपनों के भारत पर युवाओं ने रखे विचार, स्वयंसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हुआ मंथन
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
पटना, 09 जून 2026।
प्रेम यूथ फाउंडेशन द्वारा मंगलवार को पटना स्थित गांधी संग्रहालय में “मेरे सपनों का भारत” विषय पर एक विशेष संवाद एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को महात्मा गांधी के विचारों, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान तथा वर्तमान भारत में उनकी प्रासंगिकता से परिचित कराना था। कार्यक्रम में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें वे विद्यार्थी भी शामिल थे जिन्होंने हाल ही में प्रेम यूथ फाउंडेशन के साथ अपनी स्वयंसेवा पूर्ण की है तथा कई विद्यार्थी वर्तमान में भी स्वयंसेवा से जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी को श्रद्धापूर्वक नमन एवं उनके विचारों के स्मरण के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने “मेरे सपनों का भारत” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। युवाओं ने अपने संबोधन में ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत की जहाँ समान अवसर, सामाजिक न्याय, स्वच्छता, नैतिकता, शिक्षा, रोजगार और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त हो। विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला तथा बताया कि उनके सत्य, अहिंसा और सेवा के सिद्धांत आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के इंटर्नशिप समन्वयक एवं प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. मोहम्मद अली थे। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महात्मा गांधी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी का मानना था कि समाज में परिवर्तन लाने की शुरुआत स्वयं के भीतर सकारात्मक बदलाव से होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार, विचार और कार्यों में सकारात्मकता, ईमानदारी और संवेदनशीलता को स्थान दे, तो एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
डॉ. अली ने आगे कहा कि गांधीजी द्वारा प्रतिपादित “अंत्योदय” का विचार आज भी भारत के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी नीति या योजना की सफलता का वास्तविक मापदंड यह होना चाहिए कि उससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को कितना लाभ पहुंचता है। जब विकास की धारा समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग तक पहुंचेगी, तभी गांधी के सपनों का भारत साकार हो सकेगा।
कार्यक्रम में गांधी संग्रहालय के मो आशिफ
भी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को गांधीजी के जीवन, संघर्षों और उनके विचारों से जुड़ी अनेक प्रेरणादायक बातें बताईं। उन्होंने कहा कि गांधी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे विचार थे जो मानवता, नैतिकता और सामाजिक समरसता की बात करते हैं। उन्होंने युवाओं से गांधी साहित्य पढ़ने और उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।
प्रेम यूथ फाउंडेशन की ओर से प्रेम जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयंसेवा केवल समाज सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने युवाओं को स्वयंसेवा, सामाजिक सहभागिता और विभिन्न प्रकार की इंटर्नशिप से जुड़कर सीखने तथा अपने अनुभवों का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समाज के साथ काम करने से युवाओं में नेतृत्व, संवेदनशीलता, संवाद कौशल और समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित होती है।
इसके अतिरिक्त मंच पर उपस्थित गाँधी संग्रहालय के संयुक्त सचिव मो आशिफ ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गांधीजी के जीवन से जुड़े अनेक रोचक प्रसंग साझा किए। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को गांधी के व्यक्तित्व और उनके संघर्षों को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक पक्ष यह रहा कि स्नातक स्तर के विद्यार्थियों ने मंच पर आकर अत्यंत बेबाकी और आत्मविश्वास के साथ गांधीजी के विषय में वर्तमान पीढ़ी की सोच को अभिव्यक्त किया। विद्यार्थियों ने बताया कि आज का युवा गांधीजी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नैतिक नेतृत्व और जनभागीदारी के एक सशक्त प्रतीक के रूप में देखता है। प्रतिभागियों ने अपने स्वयंसेवा अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ कार्य करने से उन्हें जीवन और जिम्मेदारियों को समझने का नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान युवाओं में उत्साह, जिज्ञासा और सहभागिता का विशेष वातावरण देखने को मिला। विचार-विमर्श के माध्यम से विद्यार्थियों ने गांधीजी के विचारों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए एक बेहतर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रेम यूथ फाउंडेशन की ओर से सुलेखा कुमारी ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए प्रतिभागियों, अतिथियों एवं वक्ताओं के बीच संवाद का उत्कृष्ट वातावरण बनाया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी विद्यार्थियों ने गांधीजी के विचारों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने और गांधी के सपनों के भारत की दिशा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।



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