प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम–2026 के विरोध में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन, सितंबर तक चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा से कराया अवगत


प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम–2026 के विरोध में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन, सितंबर तक चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा से कराया अवगत


यूथ एजेंडा  की रिपोर्ट

पटना-बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम–2026 के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त कर उन्हें प्रत्यक्ष सरकारी नियंत्रण में लाने के प्रयास के विरोध में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक प्रतिनिधियों ने आज कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के प्राध्यापक प्रोफेसर संतोष कुमार के नेतृत्व में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उपेंद्र प्रसाद सिंह से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को अवगत कराया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम उच्च शिक्षा की लोकतांत्रिक एवं स्वायत्त परंपरा के लिए गंभीर चुनौती है। शिक्षकों का मानना है कि इस अधिनियम के लागू होने से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होगी, जिसके दूरगामी दुष्परिणाम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, स्वतंत्र शैक्षणिक वातावरण, अनुसंधान संस्कृति तथा संस्थागत विकास पर पड़ सकते हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता किसी भी लोकतांत्रिक एवं ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला है, और इसे कमजोर करने वाला कोई भी कदम शिक्षा व्यवस्था के व्यापक हित में नहीं माना जा सकता।

प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को यह भी जानकारी दी कि प्रस्तावित अधिनियम के विरोध में राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है। यह आंदोलन फुटाब (FUTAB), फुस्टाब (FUSTAB), बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा, जिसमें राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी एकजुट होकर भाग लेंगे।

आंदोलन के घोषित कार्यक्रमों के अनुसार, 8 अगस्त तक बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी अपने नियमित कार्यों का निर्वहन करते हुए विरोधस्वरूप काला बिल्ला धारण करेंगे, ताकि सरकार तक उनका शांतिपूर्ण किंतु स्पष्ट विरोध दर्ज कराया जा सके।

इसके पश्चात 10 अगस्त को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी सामूहिक आकस्मिक अवकाश (Mass Casual Leave) पर रहेंगे तथा संबंधित विश्वविद्यालय मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन कर प्रस्तावित अधिनियम के विरुद्ध अपना सामूहिक प्रतिरोध व्यक्त करेंगे।

आंदोलन के अगले चरण में 11 अगस्त से 25 अगस्त तक प्रतिदिन विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी कार्य के दौरान आधे घंटे का रोषपूर्ण प्रदर्शन, विरोध सभा एवं नारेबाजी करेंगे। इस अवधि में प्रस्तावित अधिनियम के संभावित प्रभावों के संबंध में व्यापक जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं समाज के अन्य वर्गों को इसके दूरगामी परिणामों से अवगत कराया जा सके।

शिक्षक संगठनों ने यह भी निर्णय लिया है कि 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के साथ व्यापक संवाद एवं विमर्श आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रस्तावित अधिनियम के विभिन्न पहलुओं, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के महत्व तथा उच्च शिक्षा पर इसके संभावित प्रभावों को समाज के समक्ष विस्तार से रखना होगा।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि 5 सितंबर के बाद चारों महासंघ संयुक्त रूप से आंदोलन की समीक्षा करेंगे तथा परिस्थितियों के अनुरूप अगले चरण की रणनीति एवं कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी, अभिभावक एवं समाज के सभी जागरूक नागरिक विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और उच्च शिक्षा की गरिमा की रक्षा के इस लोकतांत्रिक संघर्ष में सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे।

इस अवसर पर शिक्षक प्रतिनिधियों ने कुलपति से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय समुदाय की भावनाओं एवं चिंताओं से राज्य सरकार को अवगत कराते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता तथा संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए सकारात्मक पहल करें। कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा ज्ञापन प्राप्त करते हुए उनकी भावनाओं को संबंधित स्तर तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।

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