*सरथुआ में मां काली पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन होगा*
*सरथुआ में मां काली पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन होगा*
_1980 से चली आ रही नाटक की परंपरा को मिलेगा नया आयाम, दनियावां प्रखंड_
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*डॉ0 राजीव नयन की youth एजेंडा के लिए रिपोर्ट*
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*दनियावां(पटना)*दनियावां प्रखंड के सरथुआ गांव में इस वर्ष मां काली पूजा के साथ भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी परिषद के अध्यक्ष *अनिल कुमार प्रेमी*, सचिव सह खरभैया पैक्स अध्यक्ष *मुन्ना कुमार* और मीडिया प्रभारी *डॉ0 राजीव नयन* ने संयुक्त रूप से दी।
16 अगस्त 2026 को हुई ग्रामीणों की बैठक में *अनिल कुमार फौजी, मुन्ना कुमार, मन्टु कुमार शिक्षक, बमशंकर कुमार, पप्पू कुमार, रंजन कुमार, रविरंजन कुमार, संतोष कुमार, कुन्नु कुमार, सुमित कुमार, अमित कुमार, करन कुमार, संतोष रंजन, विमलेश कुमार, विजय शंकर, राजीव संजीव कुमार राणा, मुकेश कुमार, डॉ0 मिथिलेश, मंटू कुमार चंद्रवंशी (अध्यापक), रवि कुमार, भोला ठाकुर, राजू कुमार, टीपू सुल्तान* सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि महाष्टमी, नवमी और विजयदशमी के अवसर पर दनियावां प्रखंड में माता काली पूजनोत्सव पर नाटकों का मंचन किया जाएगा। साथ ही नृत्यांगनाओं की टीम द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसकी तैयारी *नवयुवक नाट्य कला परिषद, सरथुआ* कर रही है।
*परंपरा का उल्लेख*
सरथुआ गांव में 1980 के दशक से ही ग्रामीण कलाकारों द्वारा नाटकों के मंचन की समृद्ध परंपरा रही है। पहले वरीय कलाकार रामनिरंजन सिंह, सुनील कुमार विद्रोही, रामबालक भगत, धर्मेंद्र कुमार (हास्य कलाकार), अभय कुमार सिंह, सुनील कुमार व अन्य ने नाटकों के माध्यम से सरथुआ के रंगमंच को पटना जिले में एक ऊंचाई प्रदान की।
सरथुआ के रंगमंच को भव्य बनाने में स्व0 इंद्र बाबू, डॉ0 लक्ष्मी नारायण सिन्हा, शीतल महंथ, अयोध्या बाबू, हरिद्वार बाबू, मदन राम, रामा ठाकुर, जयनंदन पांडेय, अर्जुन प्रसाद स्वर्णकार, रामबालक राम, रामचंद्र प्रसाद सिंह एवं विमलभूषण सिंह, डॉ0 ब्रह्मदेव नारायण सिंह (वरिष्ठ रंगकर्मी पप्पू कुमार, शिक्षक के पिताजी) व कई अन्य गुमनाम लोगों का पर्दे के आगे, मेकअप रूम और पर्दे के पीछे अहम योगदान रहा है।
परिषद की आंतरिक बैठक में आयोजन की तैयारी को तेज करने पर सहमति बनी। कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा *30 अगस्त 2026* को होने वाली अगली ग्रामीण बैठक में तय की जाएगी। पूर्व परंपरा के अनुसार उसी दिन ग्रामीणों की सहमति से कार्यक्रम को अंतिम अनुमोदन दिया जाएगा।

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