विद्यालय पोषण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने शिक्षा-स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त प्रयास

 विद्यालय पोषण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने शिक्षा-स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त प्रयास 


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट


*शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के बेहतर समन्वय से हो बच्चों का सर्वांगीण विकास, डीएम।*


BMI, एनीमिया जांच, पोषण निगरानी एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष जोर


समस्तीपुर। विद्यालयों में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त समन्वय से विद्यालय पोषण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिले के शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों के लिए  समीक्षा सह बैठक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में विद्यालय स्तर पर बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, BMI आकलन, एनीमिया की पहचान एवं नियंत्रण तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से बच्चों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।


कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), समस्तीपुर सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के CS, RBSK के जिला समन्वयक, DPM, DCM एवं संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल रहे। दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों की समय पर पहचान और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।


प्रशिक्षण के दौरान UNICEF के स्टेट कंसल्टेंट प्रकाश सिंह एवं सुमेला मैम ने विद्यालय स्तर पर पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की प्रभावी निगरानी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के Body Mass Index (BMI) के नियमित आकलन, पोषण स्तर की पहचान, एनीमिया नियंत्रण, संतुलित आहार, स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल को विद्यालय पोषण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।


वहीं डीन, कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस, डॉ. उषा सिंह ने बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में पोषण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पोषण स्तर, वृद्धि एवं स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी आवश्यक है। विद्यालय, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर तालमेल से बच्चों तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।


कार्यशाला में BMI के माध्यम से बच्चों की वृद्धि एवं पोषण स्थिति की निगरानी, एनीमिया की समय पर पहचान, आवश्यक स्वास्थ्य जांच, RBSK के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने तथा जरूरतमंद बच्चों के उचित रेफरल पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही विद्यालय स्तर से प्राप्त स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आंकड़ों की नियमित समीक्षा और डिजिटल माध्यम से डेटा प्रविष्टि एवं रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।


अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं समग्र विकास की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों में पोषण संबंधी समस्याओं एवं एनीमिया की समय रहते पहचान कर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उन्हें स्वस्थ एवं बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है।


कार्यक्रम में डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से कार्यक्रम सलाहकार केशव कुणाल ,रौनक कुमार गुप्ता एवं शिवम कुमार सिंह उपस्थित रहे, शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक(MDM) श्री पीयूष कुमार जी  एवं स्वास्थ्य  विभाग के  सभी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ RBSK , BPM, DCM, संबंधित चिकित्सकीय एवं तकनीकी टीम तथा अन्य विभागीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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