कौशल आधारित पाठ्यक्रम समय की आवश्यकता : प्रो. शांडिल्य"

 



"कौशल आधारित पाठ्यक्रम समय की आवश्यकता : प्रो. शांडिल्य"

यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

पटना, 05 अगस्त 2026: टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में आज 40 घंटे के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम "Wildlife Tourism and Trade" का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : उपलब्धियाँ एवं भावी संभावनाएँ" विषय पर संगोष्ठी का भी सफल आयोजन किया गया। दोनों कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल-आधारित, बहुविषयक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ना था।


कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने किया। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित पाठ्यक्रम समय की आवश्यकता हैं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय समय-समय पर ऐसे प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।


प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. ज्योत्स्ना कुमारी ने बताया कि 05 से 14 अगस्त 2026 तक संचालित होने वाले इस 40 घंटे के पाठ्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता, इको-टूरिज्म, वन्यजीव व्यापार, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, CITES तथा वन्यजीव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना, संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व तथा व्यावहारिक कौशल का विकास करेगा।


पाठ्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर भी विचार व्यक्त किए गए। विद्यार्थियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा संरक्षण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।


पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सानंदा सिन्हा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध एवं रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाओं से परिचित कराएगा। आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. (डॉ.) रूपम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास तथा अनुभवात्मक अधिगम को सुदृढ़ करने की दिशा में महाविद्यालय का महत्वपूर्ण प्रयास हैं।


इसी अवसर पर भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में एनईपी समन्वयक डॉ. हंस कुमार सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : उपलब्धियाँ एवं भावी संभावनाएँ" विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने नई शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC), बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास तथा अनुसंधान की नई संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. सुनीता कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


इस अवसर पर ए.एन.डी. कॉलेज, शाहपुर पटोरी के पूर्व प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जय शंकर प्रसाद विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों सहित प्रो. अंजलि प्रसाद, डॉ. विजय कुमार सिन्हा, डॉ. विनय भूषण कुमार, प्रो. कृष्णनन्दन प्रसाद, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. तरन्नुम नसीम, डॉ. सोनू प्रताप, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. देवारती घोष, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. उषा किरण, डॉ. नूतन कुमारी, डॉ. दीपिका शर्मा, डॉ. सुषोभन पलाधी, डॉ. इफ्त नसरीन, डॉ. ओंकार पासवान तथा डॉ. अश्विनी कुमार उपस्थित रहे।


बड़ी संख्या में यूजी एवं पीजी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने दोनों कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विचार-विमर्श में सक्रिय सहभागिता निभाई।

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