वन्यजीव पर्यटन में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ : प्रो. शांडिल्य
वन्यजीव पर्यटन में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ : प्रो. शांडिल्य
टी.पी.एस. कॉलेज में “वन्यजीव पर्यटन एवं व्यापार” प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का समापन
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
पटना, 14 अगस्त 2026। टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित 40 घंटे के प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम “वन्यजीव पर्यटन एवं व्यापार” का समापन समारोह कौटिल्य सभागार में आयोजित किया गया। 5 से 14 अगस्त तक चले इस पाठ्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर सेमेस्टर-III के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना महाविद्यालय की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव पर्यटन एवं संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ हैं तथा विद्यार्थियों को जैव-विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने सफल आयोजन के लिए प्राणीशास्त्र विभाग एवं आईक्यूएसी को बधाई दी।
मुख्य अतिथि डॉ. अजित कुमार सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर प्राणीशास्त्र विभाग ने वन्यजीव संरक्षण एवं जिम्मेदार पर्यटन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। विशिष्ट अतिथि डॉ. अरुण कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष (जी.ओ.डी.) ने कहा कि भारत की समृद्ध जैव-विविधता वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार एवं विकास की व्यापक संभावनाएँ प्रस्तुत करती है।
विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना कुमारी ने स्वागत भाषण में कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सानंदा सिन्हा ने बताया कि पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वन्यजीव पर्यटन, संरक्षण, जैव-विविधता, सतत पर्यटन एवं वन्यजीव व्यापार से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. (डॉ.) रूपम ने कहा कि ऐसे कौशल-आधारित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता एवं समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया प्रभारी डॉ. मुकुंद कुमार ने कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी पहल बताया।
समापन समारोह में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अपने प्रतिक्रिया एवं अनुभव साझा किए तथा पाठ्यक्रम को उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताया। विद्यार्थियों ने भविष्य में ऐसे और अधिक कौशल-आधारित एवं व्यावहारिक पाठ्यक्रम आयोजित किए जाने के सुझाव भी दिए। विद्यार्थियों से प्राप्त इन प्रतिक्रियाओं एवं सुझावों को भविष्य में आयोजित होने वाले पाठ्यक्रमों की विषय-वस्तु, गतिविधियों एवं प्रशिक्षण पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाने में शामिल किया जाएगा।
इस अवसर पर सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की सफलता में डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. नूतन कुमारी, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. विनय भूषण कुमार, प्रो. नवेंदु शेखर, डॉ सुशोभन पलाधि, डॉ उमेश कुमार, डॉ सोनू प्रताप, डॉ रवि प्रभाकर,डॉ. देवारती घोष, डॉ. शशि शेखर सिंह एवं प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद डॉ चंद्र शेखर ठाकुर सहित छात्र प्रतिनिधि डॉ अंकित तिवारी, शिवम पराशर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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