बीपीएससी एवं TRE-4 अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों का तत्काल

 

बीपीएससी एवं TRE-4 अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों का तत्काल


समाधान करे सरकार : पप्पू वर्मा

यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

पटना, बिहार। बिहार में बीपीएससी एवं TRE-4 को लेकर आंदोलनरत छात्र-युवाओं और अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों के समर्थन में पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों, भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार हो रही देरी और स्पष्टता के अभाव के कारण आज बिहार का युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है। रोजगार, शिक्षक भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सरकार की उदासीनता युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।


उन्होंने कहा कि बीपीएससी एवं TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की पूरी भर्ती व्यवस्था में व्याप्त अनिश्चितता, देरी और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ छात्र-युवाओं का आक्रोश है। TRE-4 अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में स्पष्टता, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, परीक्षा से जुड़े नियमों पर स्पष्ट निर्णय तथा अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों के समाधान की मांग कर रहे हैं।


 *पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट के सदस्य पप्पू वर्मा* ने कहा कि आज बिहार का युवा केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर परीक्षा, निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, समयबद्ध परिणाम और निश्चित नियुक्ति चाहता है। विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार हो रही देरी के कारण हजारों युवा वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार को भर्ती प्रक्रियाओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की अपनी कार्यशैली पर रोक लगानी चाहिए।


उन्होंने कहा कि आंदोलनरत अभ्यर्थियों की आवाज को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय सरकार को उनकी वास्तविक समस्याओं और भविष्य की चिंता को समझना चाहिए। छात्र-युवाओं के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित कर बीपीएससी एवं TRE-4 से जुड़े सभी लंबित एवं विवादित मुद्दों का स्पष्ट, न्यायपूर्ण और सकारात्मक समाधान किया जाना चाहिए।


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार के युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना बंद करे सरकार। रोजगार और भर्ती के मुद्दे पर सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। छात्र-युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने समय रहते अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो छात्र-युवा समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए बाध्य होगा।

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