महात्मा गांधी के सपनों का भारत - आत्मनिर्भर, न्यायपूर्ण और मानवता पर आधारित राष्ट्र : सीए संजय कुमार झा
महात्मा गांधी के सपनों का भारत - आत्मनिर्भर, न्यायपूर्ण और मानवता पर आधारित राष्ट्र : सीए संजय कुमार झा
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
पटना। प्रेम यूथ फाउंडेशन द्वारा गांधी संग्रहालय, पटना के सभागार में “महात्मा गांधी के सपनों का भारत” विषय पर एक प्रेरक सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गांधीवादी चिंतक प्रेम जी ने की। कार्यक्रम में गांधी संग्रहालय, पटना के सचिव आसिफ वसी, एनजीओ हेल्पलाइन के निदेशक सीए संजय कुमार झा, तथा अनेक युवा प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
गांधी जी के दृष्टिकोण से , कैसा होगा सपनों का भारत? के संबंध में एनजीओ हेल्पलाइन के निदेशक सीए संजय कुमार झा ने कहा कि “गांधी जी का सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ हर हाथ को काम मिले, बेरोजगारी न रहे , कुटीर, लघु और हस्तशिल्प उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनें , ग्राम-स्वराज और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता मिले , हर व्यक्ति को रोटी, कपड़ा और सम्मानजनक जीवन मिले। सत्य और अहिंसा शासन से लेकर समाज के हर स्तर तक अपनाए जाएँ , शिक्षा रोजगार नहीं, चरित्र और कौशल निर्माण का माध्यम बने , युवा नौकरी की प्रतीक्षा छोड़कर उद्यमिता और आत्मनिर्भरता अपनाएँ।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि “सरकारी नौकरी के मोह से बाहर निकलें और स्वरोजगार को अपनाएँ। गांधी जी हमेशा कहते थे , हर हाथ को काम मिलना चाहिए। यही उनके सपनों के भारत का मार्ग है।”
आसिफ वसी (सचिव, गांधी संग्रहालय) ने कहा कि महात्मा गांधी आज भी सबसे अधिक प्रासंगिक है , महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और संदेश पर विस्तृत विचार रखते हुए कहा कि “महात्मा गांधी आज भी पूरी दुनिया में प्रासंगिक हैं। उनका आर्थिक सपना था कि भारत में कोई भी व्यक्ति अन्न और वस्त्र के अभाव में न रहे। हर व्यक्ति को जीवनयापन के लिए पर्याप्त काम मिलना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि “गांधी जी का सत्य और अहिंसा का मार्ग आज पूरे विश्व में शांति स्थापित करने का एकमात्र उपाय है। यदि दुनिया गांधी जी को सही अर्थों में समझ ले, तो हिंसा, असमानता और संघर्ष समाप्त हो जाएँ।”
देश के चर्चित गांधीवादी प्रेम जी (संस्थापक, प्रेम यूथ फाउंडेशन) ने गांधी के आदर्शों को जीवन में उतारने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि “गांधी केवल किताबों में नहीं, बल्कि हमारे जीवन में उतरने चाहिए। गांधी जी का मानना था , कोई काम छोटा नहीं होता। समाज का हर व्यक्ति यदि अपने कर्तव्य को निष्ठापूर्वक निभाए, तो भारत विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।”
उन्होंने युवाओं से कहा “युवा ही भारत के भविष्य के निर्माता हैं। गांधी के आदर्श , सेवा, सादगी, परिश्रम और सत्य , आपके जीवन का आधार बने तो नया भारत अपने आप बन जाएगा।”
छात्र-छात्राओं द्वारा गांधीवादी सिद्धांतों पर चर्चा
सेमिनार में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने गांधी जी के निम्न सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा की - सत्य , अहिंसा , स्वावलंबन , श्रम की गरिमा , ट्रस्टीशिप , ग्राम-स्वराज
समानता , सादगी , स्वच्छता , जनसहभागिता
छात्रों ने कहा कि आज के समय में गांधी जी के विचार ,
“पहले खुद बदलो”, “कोई काम छोटा नहीं”, “अहिंसा सर्वोच्च शक्ति है” उनके लिए अत्यंत प्रेरक हैं और जीवन को सही दिशा देते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों के वक्तव्य
रवि प्रकाश (प्रोग्राम ऑफिसर, फाउंडेशन)
“गांधी जी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छता को जो महत्व दिया, वह आज भारत को उन्नत बनाने का मूल आधार है।”
अनवरा अली ( एनजीओ हेल्पलाइन ) की कार्यक्रम समन्वयक ने कहा कि “महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के गांधी जी के विचार आज ‘नारी शक्ति वंदन’ और महिला सशक्तिकरण योजनाओं का आधार हैं।”
क्वीन रंजन ( एनजीओ हेल्पलाइन ) मीडिया प्रभारी ने कहा कि “गांधी जी के संवाद, धैर्य और सहिष्णुता का मार्ग आज के छात्रों के लिए एक मजबूत मानसिक आधार है।”
ज्योति कुमारी ने कहा कि “गांधी जी की शिक्षा नीति ‘बुनियादी शिक्षा’ , आज के कौशल विकास और रोजगार आधारित शिक्षा की सबसे मजबूत प्रेरणा है।”
अंजू कुमारी ने कहा कि “पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के साथ संतुलन , गांधी जी की यह सोच आज जलवायु संकट का समाधान है।”
इशिता आनंद ने कहा कि “युवाओं को डिजिटल युग में भी गांधी जी का सादगी और संयम का संदेश बहुत उपयोगी है।”
विवेक कुमार ने याद दिलाया कि “गांधीजी ने कहा था , भारत का हृदय उसके गाँवों में बसता है। हमें ग्रामीण विकास पर ध्यान देना होगा।”
सपना कुमारी ने कहा कि “गांधी जी महिलाओं को समान अधिकार और समान अवसर देने के प्रबल समर्थक थे। यह आज की आवश्यकता है।”
आरती कुमारी ने कहा कि “गांधी जी ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही वास्तविक स्वतंत्रता है। यह बात आज हर युवा को समझनी चाहिए।”
कार्यक्रम में भारी युवा सहभागिता रही ! सेमिनार में सैकड़ों छात्र-छात्राएँ, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा नेता और स्वयंसेवक उपस्थित रहे और सभी ने गांधी जी के सपनों के भारत को साकार करने का संकल्प लिया।


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