महाविद्यालयों को जिला प्रशासन के अधीन करने के प्रस्ताव का विरोध*
*महाविद्यालयों को जिला प्रशासन के अधीन करने के प्रस्ताव का विरोध*
*कर्मचारी महासंघ ने कहा - उच्च शिक्षा की स्वायत्तता खत्म होगी*
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युथ एजेंडा रिपोर्टर डॉ0 राजीव कुमार नयन की दनियावां से रिपोर्ट।🌷🌷🌧️🌧️💞🚩🚩🚩🚩
*दनियावां(पटना)* बिहार सरकार द्वारा राज्य के सभी महाविद्यालयों को जिला प्रशासन के अधीन किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने इसे उच्च शिक्षा की स्वायत्तता पर हमला बताते हुए विरोध जताया है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अब तक बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के तहत महाविद्यालय विश्वविद्यालयों के अंतर्गत संचालित हो रहे थे। नए प्रस्तावित "बिहार राज्य उच्च शिक्षा विधेयक" से संबद्ध और अंगीभूत महाविद्यालय विश्वविद्यालयों के हाथों से निकल जाएंगे। इससे शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मियों का स्थानांतरण, पदस्थापन, नियुक्ति और संस्थागत संचालन से जुड़े सभी निर्णय विश्वविद्यालयों के बजाय जिला कार्यपालिका के अधीन चले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालयों की लोकतांत्रिक संरचना - Academic Council, सिंडिकेट आदि की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP 2020 भी उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वायत्तता देने पर बल देती है, लेकिन यह प्रस्ताव उसके ठीक विपरीत है।
*विरोध में एकजुट हुए पदाधिकारी*
विरोध बैठक में बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ के *मंत्री रोहित कुमार, अध्यक्ष वेंकटेश कुमार*, पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के नेता *दीपक कुमार, मंत्री त्रिपुरारी प्रसाद, भोला सिंह, मंगलमूर्ति, संजीव कपूर, विनोद कुमार सिंह*, नालंदा यूनिट के *डॉ0 राजीव कुमार नयन, रोनित रॉय, जलेंद्र कुमार*, संरक्षक *अरुण प्रसाद*, श्रीचंद उदासीन कॉलेज हिलसा के कर्मचारी संघ के सचिव *शैलेश कुमार, आलोक कुमार सिंह,कुमार पवन, वजरंगी लाल वर्मा* सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए।
पदाधिकारियों ने सभी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और कर्मचारी फेडरेशन से अपील की कि वे इस विरोध में एकजुट हों और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में संघ की मदद करें।


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