टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का सफल समापन
टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का सफल समापन
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के इतिहास विभाग द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित 40 घंटे के "भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System–IKS): Understanding India's Traditional Wisdom and Sustainable Future" विषयक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की, जबकि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. मनोज कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय एवं समापन संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने "Relevance of Indian Knowledge System (IKS) and National Education Policy (NEP) 2020" विषय पर विस्तृत विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति ने भारतीय ज्ञान, संस्कृति, भाषाओं, परंपराओं एवं स्वदेशी बौद्धिक विरासत को शिक्षा की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उनके अनुसार NEP-2020 केवल एक शिक्षा नीति नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के मध्य एक सुदृढ़ सेतु है, जो विद्यार्थियों में भारतीयता, नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता का समन्वित विकास करने का लक्ष्य रखती है।
प्राचार्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों, शोध, नवाचार, कौशल विकास, भारतीय भाषाओं, बहुविषयक शिक्षा (Multidisciplinary Education), अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) तथा मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से व्यापक रूप से लागू करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। उन्होंने भारतीय गणित, योग, आयुर्वेद, दर्शन, पर्यावरणीय ज्ञान, धातुकर्म, कृषि विज्ञान तथा शासन परंपरा जैसे ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर विद्यार्थियों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत-2047 के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी, नैतिक, नवाचारी एवं सांस्कृतिक रूप से जागरूक नागरिक तैयार करना है, जो भारत की बौद्धिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित कर सकें।
उन्होंने इतिहास विभाग एवं आईक्यूएसी द्वारा आयोजित इस प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को धरातल पर उतारने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने पाठ्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कोर्स समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार तथा आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनके मार्गदर्शन, संरक्षण एवं नेतृत्व में महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे नवाचारपूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करता रहेगा।
पाठ्यक्रम के कोर्स समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि इस प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं समकालीन प्रासंगिकता से परिचित कराना था। उन्होंने प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य के सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं संरक्षण के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही यह पाठ्यक्रम अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों, आईक्यूएसी, शिक्षकगण तथा प्रतिभागी विद्यार्थियों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में प्रो. अंजलि प्रसाद, प्रो. नवेंदु शेखर एवं डॉ. दीपिका शर्मा (अर्थशास्त्र विभाग); प्रो. शशि भूषण चौधरी एवं डॉ. अश्विनी (हिन्दी विभाग); प्रो. विजय सिन्हा (दर्शनशास्त्र विभाग); डॉ. सुशोभन पलाधी, डॉ. उमेश एवं डॉ. सोनू प्रताप चौधरी (रसायनशास्त्र विभाग); डॉ. ऊषा किरण एवं डॉ. नूतन (राजनीति शास्त्र विभाग); प्रो. ज्योत्सना कुमारी एवं डॉ. सानंदा सिन्हा (जंतु विज्ञान विभाग), डॉ विनय भूषण ( वनस्पति विज्ञान विभाग), डॉ रवि प्रभाकर (पर्यावरण विज्ञान विभाग) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुंद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्राचार्य, विशिष्ट अतिथि, सभी संसाधन व्यक्तियों, शिक्षकगण, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
समापन समारोह में महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र डॉ. अंकित तिवारी, शोधार्थी शिवम पराशर, महाविद्यालय के कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न इस प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रति नई समझ और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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