अचलेश्वर महादेव: जहाँ शिवलिंग नहीं, शिव के दाएं पैर के अंगूठे की होती है पूजा*
*अचलेश्वर महादेव: जहाँ शिवलिंग नहीं, शिव के दाएं पैर के अंगूठे की होती है पूजा*
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काफी रहस्यमयी मंदिर है,इनका महात्म्य काफी विश्व प्रसिद्ध
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डॉ0 राजीव नयन की युथ एजेंडा के लिए माउंट आबू से की गई रिपोर्टिंग
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*दनियावां/हिलसा:* दनियावां और हिलसा से जुड़े शिक्षाविद सह वरीय मीडिया कर्मी डॉ0 राजीव नयन और उनकी अर्धांगनि नीतू नयन,पुत्र अविरल नयन,पुत्री शिवानी सुमन मंगलवार को हिलसा से नई दिल्ली होते माउंट आबू पहुंचकर रहस्यमयी अचलेश्वर मंदिर के दर्शन कर बिहार व नालंदा की उन्नति और जल-जीवन-हरियाली के कायम रहने की कामना की।
भारत में हजारों शिव मंदिर हैं, पर माउंट आबू का अचलेश्वर महादेव मंदिर सबसे अलग और पुरातन है। यहाँ भगवान शिव के शिवलिंग की नहीं, बल्कि उनके दाहिने पैर के अंगूठे की पूजा होती है।
मान्यता है कि यह स्थान अर्बुद पर्वत के नाम से जाना जाता है। जब हिमालय पर स्थित नंदी के कारण यह पहाड़ अस्थिर होने लगा, तो देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपने अंगूठे से इसे स्थिर किया। तभी से पूरा अरावली पर्वत श्रृंखला इन्हीं के अचल अंगूठे पर टिका हुआ है, इसलिए नाम पड़ा अचलेश्वर।
यहाँ एक और चमत्कार है - शिव के अंगूठे के नीचे बना गड्ढा कभी खाली नहीं होता, उसमें प्राकृतिक रूप से जल भरा रहता है।
मंदिर परिसर में पंचधातु से बनी नंदी की विशाल और प्राचीन प्रतिमा भी है, जिसका वजन करीब 4 टन बताया जाता है। कहते हैं यह दुनिया की सबसे बड़ी नंदी प्रतिमाओं में से एक है।
आज माउंट आबू यात्रा के दौरान यहाँ सपत्नीक दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया।नक्की झील में भी स्थापित भोलाशंकर की पूजा अर्चना की।विदित है कि प्रेम यूथ फाउंडेशन के संस्थापक सह बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश महासचिव श्री प्रेम कुमार की पहल से श्री नयन दंपत्ति अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में भाग लेने ब्रह्मकुमारी ॐ शांति वन में माउंट आबू आये हुए हैँ।जहाँ, अध्यात्म व वर्तमान पत्रकारिता के समक्ष आज की चुनौतियों पर देश विदेश के आये हुए जॉर्नलिस्ट विचार मंथन करेंगे।


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