शराब फैक्ट्री का मामला सीमा विवाद में उलझा वैशाली जिला में पड़ता है टापू
शराब फैक्ट्री का मामला सीमा विवाद में उलझा वैशाली जिला में पड़ता है टापू
यूथ एजेंडा की रिपोर्ट
खुसरूपुर और खिरोधरपुर की बे बजह हुई बदनामी
मद्य निषेद की टीम ने बीते कल नकली शराब फैक्ट्री पकड़ी।अखबारों और मद्य निषेध विभाग की शुरुआती रिपोर्टों में इसे खुसरूपुर (पटना) क्षेत्र का बताकर प्रचारित किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में केस खुसरूपुर थाने में दर्ज नहीं हो सका क्योंकि वह भौगोलिक स्थल (खिरोधरपुर दियारा) वैशाली जिले के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में आता है।यह छापेमारी पटना जिला मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की विशेष टीम (मद्य निरीक्षक लालू कुमार के नेतृत्व में) द्वारा की गई थी। पटना की टीम ने कार्रवाई तो अपनी गुप्त सूचना के आधार पर कर दी, लेकिन जब मामला स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराने का आया, तब सीमा(Jurisdiction) का तकनीकी पेंच फंस गया।नक्शे के अनुसार वह टापू या दियारा क्षेत्र वैशाली जिला पुलिस की सीमा में आता है। यही कारण है कि घटना की कानूनी एंट्री और औपचारिक केस खुसरूपुर थाने में दर्ज नहीं हो पाई।प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपनी पीठ थपथपाने और "क्रेडिट" लेने की जल्दी में ये गड़बड़ियां की गई,जो कतई उचित नहीं है।अक्सर पटना की टीम वैशाली के इलाके में जाकर रिकवरी करती है और शुरुआत में उसे पटना जिले की सफलता बताकर मीडिया में जारी कर दिया जाता है, जबकि बाद में केस दर्ज करने के लिए उसे संबंधित जिले (वैशाली) को फॉरवर्ड करना पड़ता है या क्षेत्राधिकार का कानूनी विवाद खड़ा हो जाता है।
मद्य निषेद विभाग की टीम ने सफलता तो अर्जित की,पर अकारण ही खुसरूपुर और खिरोधरपुर को बदनाम कर दिया।सरकार के इन नुमाइंदों को असली जगह का उल्लेख करनी चाहिए थी।अब इन्हें इसका जवाब देनी चाहिए।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें