हिन्दी ही भारत माता की ललाट की बिंदी -एस यू कॉलेज में हिन्दी दिवस पर विद्वानों का मंथन* --
*हिन्दी ही भारत माता की ललाट की बिंदी -एस यू कॉलेज में हिन्दी दिवस पर विद्वानों का मंथन*
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हिलसा के अनुमंडलाधिकारी श्री अमित कुमार पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे मौजूद
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डॉ0 राजीव नयन की यूथ एजेंडा के लिए रिपोर्ट।
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*दनियावां/हिलसा |* हिन्दी भाषा के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए पूरे देश में 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में अनुमंडल प्रशासन, हिलसा द्वारा एस यू कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हाल में सोमवार को हिन्दी दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। सभागार में "हिन्दी है हमारी शान, हिन्दी है हमारी पहचान" और "हिन्दी अपनाएँ - देश बढ़ाएँ" के नारों के साथ आधुनिक हिन्दी के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का चित्र लगाया गया था।
आपको बता दें कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था, तभी से हर साल यह दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
*हिन्दी दिवस पर अपने अध्यक्षीय संबोधन प्राचार्य प्रो० डॉ० शिवचन्द्र सिंह* ने हिन्दी भाषा के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा - "भारत में आज भी 1652 बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन हिन्दी ही वह डोर है जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। हमने राजनीतिक गुलामी से तो मुक्ति पा ली, लेकिन जो मानसिक और मनोवैज्ञानिक गुलामी है, उससे अभी मुक्त नहीं हो पाए हैं। अंग्रेजों ने प्रभाव से भाषा थोपने की कोशिश की, जबकि हमें भाव से हिन्दी को अपनाना होगा। *इसलिए अपनी भाषा के प्रति मान और स्वाभिमान की भावना रखनी चाहिए।*"
कार्यक्रम में मौजूद विशिष्ट अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी *अमित कुमार पटेल* ने कहा कि हिन्दी केवल सरकारी कार्यालयों की भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, संस्कार और एकता की आवाज है। उन्होंने सभी अधिकारियों और युवाओं से आह्वान किया कि हिन्दी के संवर्धन के लिए संकल्प लें और *जीवन में कोई न कोई हिन्दी साहित्य अवश्य पढ़ें। उन्होंने उपस्थिति लोगों और बिहार वासियों को सोमवार को हरितालिका तीज व गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं भी दीं।*
*मीडिया प्रभारी डॉ० राजीव कुमार नयन* ने हिन्दी भाषा के वैश्विक स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि हिन्दी आज केवल साहित्य की नहीं, बल्कि रोजी-रोजगार की भाषा बन गयी है। हिंदी पूरे भारत को एकसूत्र में पिरोती है।हिंदी भारत माता के ललाट की बिंदी है।उन्होंने याद दिलाया कि *4 अक्टूबर 1977 को तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में पहली बार हिन्दी में अपना संबोधन देकर भारत की राजभाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।*
*डॉ० अभिषेक कुमार* ने जोर देकर कहा कि जब तक मेडिकल, यांत्रिकी और तकनीकी की पढ़ाई हिन्दी में नहीं होगी, तब तक हिन्दी का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।
इस अवसर पर अध्यापक डॉ सम्राट सरकार और डॉ0 भुवनेश्वर मंडल ने हिंदी भाषा के विश्व्यापी बनाने में हिंदी फिल्मों के योगदान की चर्चा की और राजकपूर के फ़िल्म मेरा नाम जोकर के प्रसिद्ध सॉन्ग मेरा जूता है जापानी,ये पतलून इंग्लिशतानी,सर पे लाल टोपी रूसी,फिर भी दिल है हिंदुस्तानी की रूस में लोकप्रिय ता का उदाहरण दिया।डॉ0 पिंकी कुमारी व प्रो0 अरविंद कुमार,डॉ0 प्रभात कुमार ने आधुनिक हिंदी को आगे ले जाने में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, पंत,निराला, दिनकर,महादेवी,जयशंकर प्रसाद के योगदान की चर्चा की। डॉ० पीसी चौरसिया,डॉ0 घनश्याम कुमार(विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग),शिक्षाविद कुमार पवन, प्रो० शिवप्रसाद ठाकुर ने भी हिन्दी के भविष्य, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे।
छात्र वर्ग से रिशु पटेल, संजय कुमार और आशीष कुमार ने भी हिन्दी दिवस पर अपनी बात रखी।
मौके पर *मुनील पटेल,मधुसूदन कुमार,जलेंद्र कुमार,राजा,नवीन कुमार,गार्ड राजेश यादव,अजीत कुमार,चिंटू, परमेन्द्र यादव छात्रसंघ के शैलेश कुमार,संजय कुमार, रजनीश शर्मा, गुलशन कुमार, आशीष कुमार, आलोक कुमार सिंह, रोनित रॉय, प्रदीप कुमार, मीडिया कर्मी संतोष पार्थ, धनपत कुमार, सियापति देवी* सहित सौ से अधिक शिक्षक, छात्र, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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