महात्मा गांधी के शिक्षा-दर्शन में विद्यार्थी और राष्ट्र निर्माण का विशेष महत्व : वक्ता


महात्मा गांधी के शिक्षा-दर्शन में विद्यार्थी और राष्ट्र निर्माण का विशेष महत्व : वक्ता


यूथ एजेंडा की रिपोर्ट

पटना, 26 सितंबर 2026। कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के इतिहास विभाग के तत्वावधान में शनिवार को “महात्मा गांधी, शिक्षा एवं विद्यार्थी” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अरविंद कुमार ने की।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के IQAC के अध्यक्ष-सह-समन्वयक प्रो. संतोष कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं गांधी के शिक्षा-दर्शन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था के विकास में गांधी के शैक्षिक विचारों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। उन्होंने गांधी के शिक्षा-दर्शन की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

महाविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शुक्ला ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में “महात्मा गांधी, शिक्षा एवं विद्यार्थी” का विषय अत्यंत प्रासंगिक है और इस पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में गांधी के विचारों की उपयोगिता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अरविंद कुमार ने गांधी के शिक्षा संबंधी विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी ने औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप को चुनौती देते हुए शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का कार्य किया। उनके अनुसार गांधी की दृष्टि में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का साधन थी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गुजरात विद्यापीठ के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विक्रम सिंह अमरावत ने गांधी के जीवन-दर्शन में शिक्षा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गांधी शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण का अनिवार्य साधन मानते थे। उन्होंने गांधी के जीवन की विभिन्न घटनाओं एवं प्रसंगों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के प्रति उनके विचारों तथा शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण को स्पष्ट किया।

इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रणजीत कुमार ने विद्यार्थियों से गांधी के जीवन, आदर्शों और शिक्षा-दर्शन को अपने जीवन एवं व्यवहार में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांधी के विचार आज भी विद्यार्थियों को नैतिकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. सुनीता लाल के स्वागत भाषण से हुई। डॉ. संतोष रजक ने मंच संचालन किया। व्याख्यान के दौरान इतिहास विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। इसमें रविकांत, सुधांशु, साहिल, काजल, इशिका, आस्था, संजना, राशिका, साक्षी, साइना, सुनंदनी, रिचा सहित अन्य विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. ऊषा प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, इतिहास विभाग के विद्यार्थी एवं अन्य छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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