हिन्दी विकास मंच, सरथुआ, पटना व नालंदा में मनाई गई राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती*

 *हिन्दी विकास मंच, सरथुआ, पटना व नालंदा में मनाई गई राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती*



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डॉ0 राजीव नयन यूथ एजेंडा के लिये

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*हिलसा / सरथुआ,दनियावां (पटना)।* हिन्दी विकास मंच, सरथुआ, पटना और उसकी उपशाखा हिलसा, नालंदा के बैनर तले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष साहित्यकार व प्राध्यापक *डॉ. राजीव नयन सिंह* ने की। उन्होंने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर बिहार की मिट्टी से निकले महान सपूत थे💐💐🌈🌈🌈🌧️🌧️🌧️🌧️🌺🌹🖋️📚। उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था और 24 अप्रैल 1974 को उनका निधन हुआ।

डॉ. नयन ने कहा कि दिनकर जी केवल कवि नहीं, बल्कि युग के चारण थे। वे स्वतंत्रता से पहले विद्रोही कवि और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि के रूप में स्थापित हुए। उनकी लेखनी में ओज, विद्रोह, आक्रोश और कोमल श्रृंगार का अद्भुत संगम मिलता है। उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ - रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, रेणुका, हुँकार, संस्कृति के चार अध्याय और उर्वशी हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।

उन्होंने बताया कि *उनकी कृति 'उर्वशी' पर उन्हें हिंदी का सर्वश्रेष्ठ ज्ञानपीठ पुरस्कार (1972) प्राप्त हुआ था।* इसके अलावा उनकी पुस्तक 'संस्कृति के चार अध्याय' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया गया था। पटना विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में बी.ए. करने वाले दिनकर जी मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष, भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत सरकार के हिंदी सलाहकार तथा 12 वर्षों तक राज्यसभा सदस्य भी रहे।

संस्था की *सचिव नीतू नयन* ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवाओं को दिनकर को पढ़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिनकर जी की कविताएं - 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' आज भी सत्ता को चेतावनी देती हैं। उर्वशी में उन्होंने प्रेम, सौंदर्य और अध्यात्म को जिस दार्शनिक ऊंचाई पर पहुँचाया है, वह युवाओं को जीवन का सही अर्थ समझाता है। हमें अपने बच्चों को मोबाइल की चकाचौंध से निकालकर रश्मिरथी और कुरुक्षेत्र जैसी रचनाएं पढ़ानी चाहिए ताकि उनमें राष्ट्रप्रेम और नैतिक साहस जागे।

उन्होंने आगे कहा कि हिन्दी विकास मंच का उद्देश्य ही बिहार के ऐसे महापुरुषों की जयंती को गाँव-गाँव तक पहुँचाना है।

इस अवसर पर 'रश्मिरथी' के अंशों का पाठ किया गया और छात्रों ने दिनकर की कविताओं पर आधारित भाषण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने दिनकर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मौके पर विहान पारिजात, अविरल नयन, शिवानी श्री, दीपशिखा, वार्ड 11 के पार्षद शम्भू कुमार (अधिवक्ता), साकेत कुमार, चांदनी कुमारी (महराजगंज), रिकी कुमार (पार्थु) व छात्र संघ श्रीचंद उदासीन महाविद्यालय के पाटलिपुत्र प्रभाग के अध्यक्ष आशिष कुमार पटेल,रिशु पटेल,विभूति यादव,पंकज यादव,रौशन मिश्रा,साहिल पटेल, कपसियावां के राकेश शर्मा,ब्रह्मर्षि  ध्रुव ,रामदयाल पासवान सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिलसा उपशाखा के संयोजक सामजिक कार्यकर्ता व सम्पूर्ण क्रांति मोर्चा,हिलसा के अध्यक्ष जैनेन्द्र कुमार(सैदनपुर) ने की।

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